लोकल डेस्क, ऋषि राज।
रक्सौल: चरित्र ही जीवन की आधारशिला है। मनुष्य संसार में जो कुछ सफलता,सौभाग्य,सुख प्राप्त करता है,उसके मूल में उसके चरित्र की ही उच्चता रहती है।
उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।निर्बल चरित्र वाले अथवा चरित्रहीन व्यक्ति का जीवन निस्सार और महत्वशून्य है।चाहे वह सांसारिक दृष्टि से थोड़ा सा अधिक धन प्राप्त करके आराम का जीवन व्यतीत करता हो,पर अन्य लोगों की दृष्टि में वह कभी प्रतिष्ठा या सम्मान का पात्र नहीं हो सकता।चरित्रवान व्यक्ति किसी भी स्थान या देश में चला जाय,वह सदा सम्मानयुक्त जीवन व्यतीत करेगा।
मनुष्य कभी भी जन्म से पापी,दुष्ट या नीच नहीं होता,अपितु साधारण मनुष्य में भी यह शक्ति होती है कि ज्योहीं वह कुमार्ग पर पैर रखता है,नीचता के कार्यों में प्रवृत्त होता है,वैसे ही उसकी अंतरात्मा उसे रोकती है,चेतावनी देती है,सावधान करती है।समाज भी ऐसे लोगों के प्रति प्रतिबंध रखता है और इसके विपरीत चलने वालों को घृणा की दृष्टि से देखता है।वैसे ईश्वर ने हमको जन्म से ही ऐसी शक्ति दी है कि सच्चरित्रता को प्राप्त कर सकना कठिन नहीं है , वरन् वह एक स्वाभाविक बात है।संसार में सभी मनुष्य स्वभावतः अमर जीवन या दीर्घ जीवन की इच्छा करते हैं।दीर्घ जीवन तभी सार्थक है जब हम अपने उपलब्ध संसाधनों का मानव एवं समाज की भलाई व उत्थान में उपयोग करें।दीर्घ जीवन पुण्यात्मा का ही अच्छा है,पापी बन कर अधिक समय जीना तो और भी दुर्भाग्य की बात है। इसलिए मनुष्य मात्र का कर्तव्य है कि वे सदैव परमात्मा से यही प्रार्थना करें कि वह उनको सच्चरित्र, परोपकारी, समाज सेवक बना कर सुमार्ग पर चलने की शक्ति दे।







